केंद्र को पंजाब के प्रदूषण की चिंता: पराली प्रबंधन में केंद्र ने बढ़ाए मदद के हाथ

पंजाब में अब भी लगभग 20 मिलियन टन पराली हर साल खेतों में जला दी जाती है। इसी कारण दिल्ली तक प्रदूषण फैलता है। इसे रोकने के लिए केंद्र सरकार राज्यों को ऐसी मशीनें खरीदने के लिए पैसा दे रहा है, जिनसे पराली जलाने की बजाय उसे मिट्टी में मिला दिया जाए और बुवाई भी मशीनों से कर ली जाए। इस साल खरीफ की फसल पकने से पहले ही केंद्र ने पंजाब को 235 करोड़ रुपए जारी किए हैं, जिनसे राज्य में लगभग 25 हजार मशीनें किसानों और किसान समूहों को देने की तैयारी है। पराली खेतों में जलाने की योजना को क्रॉप रेज्डियू मैनेजमेंट (सीआरएम) यानी पराली प्रबंधन कहते हैं। इसके लिए केंद्र लगातार राज्यों को मदद कर रहा है, जिसमें से सबसे ज्यादा हिस्सा पंजाब को दिया जाता है। पिछले तीन साल में पंजाब के किसानों को मशीनें देने के लिए 810 करोड़ रुपए मिले हैं। बताया जाता है कि तीन साल पहले प्रधानमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप पर इस योजना में राज्यों को फंड देने का फैसला किया गया था। राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने भी पराली जलाने से रोकने के आदेश दिए हुए हैं, किंतु साथ ही यह भी कहा कि किसानों को जागरूक करने के साथ ही उन्हें मशीनरी खरीदने के लिए प्रेरित किया जाए। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उप्र में पराली जलाने के कारण जाड़ों में दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ जाता है।

केंद्रीय योजना को लेकर उत्साह : व्यक्तिगत किसानों को 50% सब्सिडी, किसान समूहों को 80% सब्सिडी
385 किसान समूहों ने मशीनें लेने के लिए आवेदन किया मशीनरी खरीदने के लिए किसानों को व्यक्तिगत रूप से 50% सब्सिडी मिलती है, मगर किसान एफ.पी.ओ. जैसे समूह बना लें तो सब्सिडी 80% तक मिलती है। केंद्र सरकार वैसे भी कृषि बिजनैस को प्रोत्साहन देने के लिए एफ.पी.ओ. बनाने पर नाबार्ड के जरिए कई प्रकार की रियायतें दे रही है। साल 2024 तक 10 हजार नए एफ.पी.ओ. बनाने की योजना है और इसके लिए 6,865 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

तीन साल में 76 हजार मशीनें बांटी गईं, इस साल आंकड़ा 1 लाख पार कर लेगा
जागरूकता बढ़ने और मशीनें मिलने से पंजाब के किसान भी इस राष्ट्रीय संकट को रोकने के लिए पराली जलाने से मुंह मोड़ने लगे हैं। केंद्र से मिले फंड से पंजाब के किसानों को पिछले तीन साल (2018-20) में लगभग 76 हजार मशीनें उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। इस साल 25 हजार मशीनें और मिलने से यह आंकड़ा एक लाख पार कर जाएगा। वैसे मशीनों के लिए राज्य को लगभग 50 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं।

पराली प्रबंधन: किसानों को मल्चर समेत कई मशीनें दी जाती हैं
पराली प्रबंधन योजना में किसानों को सुपर श्रेडर, हैप्पी सीडर, रिवर्स प्लो, जीरो टिल ड्रिल, बेलर, सुपर एसएमएस और मल्चर मशीनें दी जाती हैं। मल्चर मशीन पराली को जमीन में ही दबा देती है। इसके बाद खेत में पानी छोड़ दिया जाता है, जिससे 15 दिन में पराली मिट्टी बन जाती है। हैप्पी सीडर से बीज बोने में आसानी रहती है।

मालवा और माझा में सबसे ज्यादा पराली जलाने की घटनाएं
पंजाब में पराली जलाने की सबसे अधिक घटनाएं मालवा में पटियाला, मानसा, मोगा, बठिंडा, फिरोजपुर, बरनाला, संगरूर, मुक्तसर और माझा में तरनतारन जिलों में होती हैं। पंजाब रिमोट सैंसिंग डिपार्टमेंट ने पिछले साल सितंबर से नवंबर तक पराली जलाने की कम से कम 70 हजार घटनाएं दर्ज की थीं। इन पर जिलों में केस भी दायर होते हैं, मगर अभी किसानों पर कार्रवाई कम ही होती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *